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कौन सा जख्म था जो ताजा न था इतना गम मिलेगा इश्क में हमें अंदाजा ना था !
तुम्हारी तस्वीर से गिला हैं मुझे… ये मुझ से बात क्यों नहीं करती..!!!🥺
उम्मीद दर्द देती है….!! और दर्द असलियत से रूबरू कराती है…!!! 🙂↕।
अब किससे कहें रिश्तों का दर्द अपना सभी के पास तो मौजूद है मर्ज अपना।
उनकी नजरो में फर्क अब भी नहीं है, पहले मूड के देखते थे, और अब देख के मूड जाते है!
ज़िंदगी की दास्तानें हमें रुला देती हैं, जब तन्हाई की छाया में हम खुद को पाते हैं।
वो कहती थी तुम्हारे बाद भी सिर्फ तुम्हारी हूंगी वो मेरे होते हुए भी किसी और की हो गई🖤।
मूड ऑफ होने का मतलब ये नहीं कि कमज़ोर हूँ, बस थक गया हूँ सब कुछ सहते-सहते।
आज फिर दिल भारी-भारी सा है, शायद फिर किसी ने यादों को छेड़ा है।
दिल अब किसी से उम्मीद नहीं करता, क्योंकि उम्मीदें ही तोड़ती हैं।
तन्हाई का कोई मोल नहीं, मगर हर दर्द की शुरुआत वहीं से होती है।
जिससे उम्मीद थी उसी ने तोड़ दिया, अब किससे शिकायत करें?
टूटे हुए ख्वाबों की कहानी रह गई, हर मुस्कान में भी एक निशानी रह गई। वो जो साथ थे कभी हर मोड़ पर, अब बस यादों में ही रवानी रह गई।
खुद को समझाना आसान नहीं, जब मन ही मन से नाराज़ हो जाए।
कभी-कभी बेवजह ही मूड खराब हो जाता है, जैसे कोई अधूरी कहानी फिर से याद आ जाती है।
हर कोई पूछता है क्यों चुप हो, किसे बताऊँ दिल कितना दुखी हो?
मूड ऑफ है, दिल साफ है, बस किस्मत थोड़ी खराब है।
मूड ऑफ है पर आदत नहीं किसी को जताने की।
इतना भी मत पूछो क्या हुआ है, मूड खराब है, दिल टूटा है, बस वही पुरानी कहानी है।
मूड ऑफ तब होता है, जब दिल और दिमाग लड़ते हैं।

हर बात पे मुस्कुरा नहीं सकते, कभी-कभी अंदर से टूट जाते हैं।
खामोशियाँ सब कुछ कह देती हैं, शब्दों की ज़रूरत नहीं रहती।
मूड ऑफ है लेकिन ज़िंदगी रुकती नहीं, ये भी एक हुनर है जो हर किसी में नहीं।
अब कोई फरियाद नहीं करता, दिल का दर्द अब सिर्फ खुद से कहता है ।
मूड ऑफ है पर कोई समझ नहीं पाता, हँसते चेहरे के पीछे दर्द जाता।
मूड ऑफ है क्योंकि दिल टूटा है, किसी ने फिर वादों से धोखा दिया है ।
हर बार रोना जरूरी नहीं, कभी-कभी अंदर ही अंदर टूटना पड़ता है।
धीरे धीरे ख़तम हो ही जायेंगे…. ग़म नहीं तो हम ही सही.!!
रिश्ते हमेशा दो वजह से खराब होते है ऐक अहम औऱ दूसरा वहम.!!
बुला रहा है कौन मुझको उस तरफ मेरे लिए भी क्या कोई उदास बेक़रार है.!!
मैने मुस्कुराकर जित लिया दर्द अपना लोग मुझे दर्द देकर भी मुस्कुरा न सके.!!
न वो आ सके न हम कभी जा सके न दर्द दिल का किसी को सुना सके बस खामोश बैठे है उसकी यादों में न उसने याद किया न हम उसे भुला सके.!!
कौन सा जख्म था जो ताजा न था इतना गम मिलेगा इश्क में हमें अंदाजा ना था.!!
थक गया हु मै ए ज़िंदगी तेरे झांसों से, आखिर हासिल ही क्या हुआ मुझे तेरे झूठे दिलासों से.!!
पता है लाश पानी पर क्यों तैरती है क्योंकि डूबने के लिए ज़िंदगी चाहिए.!!
कसूर तो बहुत किये जिंदगी में, पर सजा वहा मिली जहां बेकसूर थे हम.!!
यह कलयुग है जनाब यहां कसम खाने वाला नहीं.. शराब पीने वाला सच बोलते हैं.!!