Skip to contentSad Alone Shayari in Hindi

हालात खराब हो तो अपने ही, गैरो के जैसा बर्ताव करने लगते है..!
मुझको मेरी तन्हाई से अब शिकायत नहीं है, मैं पत्थर हूँ मुझे खुद से भी मोहब्बत नहीं है..!
कितनी अजीब है इस शहर की तन्हाई भी, हजारो लोग है मगर कोई उस जैसा नहीं है..!
काग़ज़ रोते नहीं है, बस रूला देते हैं..!
इस अकेलेपन से अब तंग आ गया हूं, इसलिए बहुत से आईने खरीद लाया हूं..!
अकेला भी इस तरह पड़ गया हूं, कि मेरा हौसला भी साथ नहीं दे रहा है..!
मीठी सी खुशबू में रहते हैं गुमसुम, अपने अहसास से बाँट लो तन्हाई मेरी..!
गजल गाने का शौक नही, रहा हमे हम तो अब दर्द ए दिल बयां करते है..!
उस मुकाम पे आ गई है ज़िन्दगी जंहा, मुझे कुछ चीज़े पसंद तो है पर चाहिए कुछ नहीं..!
कितना अकेला हो जाता है वो शख्स, जिसे जानते तो बहुत लोग है, मगर समझते कोई नही..!
जिनकी मोहब्बत सच्ची होती है, उनके नसीब में दर्द ही लिखा होता है..!
अकेले पन की राहो पर वही व्यक्ति चलता हैं जिसने इस दुनिया-दारी से सबक सीख लिया होता हैं..!
तुम क्या जानो हम अपने आप में कितने अकेले है, पूछो इन रातो से जो रोज़ कहती है के खुदा के लिए आज तो सो जाओ..!
कुछ कर गुजरने की चाह में कहाँ-कहाँ से गुजरे, अकेले ही नजर आये हम जहाँ-जहाँ से गुजरे..!
जब तोड़ना ही था तो रिश्ता जोड़ा क्यों खुशी नहीं दे सकते थे तो हमारा गम से नाता जोड़ा क्यों..!
कभी घबरा गया होगा दिल तन्हाई में उनका, मेरी तस्वीर को सीने से लगा कर सो गए होंगे..!
एक तेरे ना होने से बदल जाता है सब कुछ कल धूप भी दीवार पे पूरी नहीं उतरी..!
मंज़िल पास है, इसलिए अकेला हूँ। अगर दूर जाना होता, तो किसी को आवाज़ लगा लिया होता..!
अधूरे चांद से फरियाद तो करता होगा, वो मुझे ज्यादा नहीं पर याद तो करता होगा..!
आज उसने एक दर्द दिया तो याद आया, हा हमने भी तो दुआओं में उसके सारे दर्द मांगे थे..!
बहुत खूबसूरत है न मेरा ये वहम, कि तुम जहां भी हो सिर्फ मेरे हो..!
तेरी मुहब्बत पर मेरा हक तो नही पर दिल चाहता है, आखरी सास तक तेरा इंतजार करू..!
मैं जो हूँ मुझे रहने दे हवा के जैसे बहने दे, तन्हा सा मुसाफिर हूँ मुझे तन् हा ही तू रहने दे..!
आदत बदल गई है वक्त काटने की, हिम्मत ही नही होती दर्द बांटने की..!
याद हैं मुझे मेरी गलती, एक तो मोहब्बत कर ली, दूसरी तुमसे कर ली, तीसरी बेपनाह कर ली..!
जानता पहले से था मै लेकिन एहसास अब हो रहा है, अकेला तो बहुत समय से हूँ मैं पर महसूस अब हो रहा है..!
कैसे गुजरती है मेरी हर एक शाम, तुम्हारे बगैर अगर तुम देख लेते तो, कभी तन्हा न छोड़ते मुझे..!
इश्क में मेरा इस कदर तो टूटना लाजमी था यारो, कांच का दिल था और मोहब्बत पत्थर से की थी..!
अकेले तो हम पहले भी जी रहे थे, क्यूँ तन्हा से हो गए हैं तेरे जाने के बाद..!
तुम से बिछड़ के कुछ यूँ वक़्त गुज़ारा, कभी ज़िंदगी को तरसे कभी मौत को पुकारा..!
खुद में झांकने के लिए जिगर चाहिए साहब, दूसरों को जलील करने में तो हर शख्स माहिर होता है..!
मोहब्बत में हम सिर्फ उनसे हारे हैं जो हमसे ये कहते थे कि हम सिर्फ तु म्हारे हैं
अकेले खड़े रहने का साहस रखिए, दुनिया ज्ञान देती है साथ नहीं!!
वक़्त ने बता दी लोगों की औकात वरना हम वो थे जो सबको अपना कहते थे….।
हँसकर दर्द छुपाने का हुनर मशहूर था मेरा ! पर कोई हुनर काम न आया जब तेरा नाम आया !!
बुरे नहीं हैं हम, बस सबको अच्छे नहीं लगते..!
रिश्तें उन्ही से बनाओ ! जो निभाने की औकात रखते हों !!
मन ही तो था कोई और बहला गया होगा दिल ही तो था किसी और पर आ गया होगा
आज के ज़माने में खुश वही है जो मतलबी है
उतर गए हैं सब दिल से अब अकेले रहना ही अच्छा लगता है
ज़िन्दगी में मंज़िले तो मिल ही जाती हैं ! लेकिन वो लोग नहीं मिलते जिन्हें दिल से चाहा हो !’
दुःख की बात यह है कि हम उस दौर में जी रहे हैं कि मासूमियत को भी बेवकूफ़ी कहा जाता है।
रूठूँगा तुझसे तो इस क़दर रूठूँगा तेरी आँखे तरस जाएगी मेरी एक झलक को !!
पता नहीं कब खत्म होगी ये जिन्दगी सचमें अब जीने का मन नहीं करता..,
ये दिन भी क़यामत की तरह गुज़रा है ! न जाने क्या बात थी हर बात पर रोना आया !!
ख्वाहिशों की पोटली सिर लिए चल रहा हूँ,मैं अकेला ही अपनी मंज़िल की और चल रहा हूँ
हम तो आज भी अकेले नहीं रहते,हमारे अकेलेपन ने हमें अपना बना लिया है।
न जाने किस कॉलेज से ली थी मोहब्बत की डिग्री उसने ! जितने भी मु झसे वादे किये थे सब फ़र्ज़ी निकले !!
आज कुछ अजनबी सा अपना वजूद लगता है,साथ है सब मगर दिल क्यों अके ला सा लगता है !
भूलने वाली बातें याद हैं ! इसलिए ज़िन्दगी में विवाद है !!
धोखा देने के लिए शुक्रिया तेरा ! तुम न मिलती तो दुनिया की समझ न आती !!
इस दुनिया की सच्चाई और राजजितना कम जानोउतना ज्यादा ही अच्छा है..
किसी को गलत समझ लेने से पहले उसकी हालत जरूर देख लेना।
इंसान सिर्फ एक कारण से अकेला पड़ जाता हैं,जब उसके अपने ही उसे गलत समझने लगते हैं..!!
लोग हमारी क़दर उस वक़्त नहींकरते जब हम अकेले हो बल्कि,उसवक़्त करते हैं जब वो अकेले होते हैं।
Alone Shayari

तेरे बदलने का दुख नहीं है मुझको… मैं तो अपने यकीन पर शर्मिदा हूं…
छोटे बच्चे के निकले आंसू और प्यार में निकले आंसू दोनों एक सामान हैं ! दोनों को पता है कि दर्द कहा है लेकिन किसी को बता नहीं सकतें !!
मतलब ना हो तो लोग, बोलना तो क्या देखना भी छोड़ देते हैं।
जनाब तुम मोहब्बत की बात करते हो हमने तो दोस्ती में भी धोखे खाएं हैं
यूँ सिमट गया मेरा प्यार चंद अल्फाज़ो में ! जब उसने कहा मोहब्बत तो है पर तुमसे नहीं !!
मैं हमेशा डरता था उसे खोने से ! उसने ये डर ही ख़त्म कर दिया मुझे छोड़कर !!
बदलते तो सब हैं कोई सही वक्त पे तो कोई बुरे वक्त पे..!
जिन्दगी मे और कुछ मेरा हो या ना हो,लेकिन गलती हमेशा मेरी ही होती हैं।
अब थोड़ा जल्दी कामयाब कर दे ऐ खुदा.. अब घर के बुरे हालात देखे नहीं जाते
यही सोचकर सफाई नहीं दी हमने ! इल्ज़ाम भले ही झूठे हैं पर लगाए तो तुमने हैं !!
ये दुनिया है जनाब महफ़िल में सलाम और अकेले में बदनाम करती है!
तू और तेरे वादे दोनों ही झूठे निकले
कैसे गुजरती है मेरी हर एकशाम तुम्हारे बगैर अगर तुमदेख लेते तो कभी तन्हा नछोड़ते मुझे।
मैं नाराज नहीं हूं तुम से पर दिल दुखा है मेरा…
मुझे गिरे हुए पत्तों ने सिखाया है,बोझ बन जाओगे तो अपने भी गिरा दे ंगे।
मैं कहाँ जनता हूँ दर्द की क़ीमत ! मेरे अपनों ने मुझे मुफ्त में दिया है !!
तुम क्या जानो हम अपने आपमें कितने अकेले है,पूछो इनरातो से जो रोज़ कहती है केखुदा के लिए आज तो सो जाओ
“अकेले ही गुज़रती है ज़िन्दगी ! लोग तसल्लियाँ तो देते है पर साथ नहीं !!”
जिंदगी नहीं रुलाती है रुलाते हैं वो लोग जिन्हें, हम जिंदगी समझ लेते हैं..
दिल धोखे में है और धोखेबाज दिल में
अपनो ने अकेला इतना कर दिया,कि अब अकेलापन ही अपना लगता है।
इश्क से ज्यादा तो किस्मत बेवफा होती हैजरूरत के वक्त ही साथ छोड़ जाती है.!!
कभी-कभी मेरा दिल करता है कि बैठकर इतना रोऊँ कि रोते-रोते ही मर जाऊं
वहां से बिगड़ी है जिंदगी मेरीजहाँ से साथ तुमने छोड़ा था
मैंने आज़ाद कर दिया हर वो रिश्ता,हर वो इंसान,जो सिर्फ अपने मतलब के लिए मेरे साथ था।
अभी धूप निकलने के बाद भी जो सोया है ! वो ज़रूर तेरी याद में रातभर रोया है !!
कभी सोचा न था तन्हाइयों का दर्द यूँ होगा, मेरे दुश्मन ही मेरा हाल मुझसे पूछते हैं।
जितना बदल सकते थे बदल लिया खुद को, अब जिसको शिकायत हो वो अपना रास्ता बदल ले।
इश्क़ कर लीजिये बेइंतेहा किताबों से, एक यही हैं जो अपनी बातों से पलटा नहीं करतीं।
नींद भी नीलाम हो जाती है बाज़ार ए इश्क़ में, किसी को भूल कर सो जाना आसान नहीं होता।
न जाने क्यों खुद को अकेला सा पाया है, हर एक रिश्ते में खुद को गवाया है, शायद कोई तो कमी है मेरे वजूद में, तभी हर किसी ने हमे यूँ ही ठुकराया है।
जो अकेले रहना सीख जाते है, उन्हें फिर किसी और की जरुरत नहीं पड़ती।
काश तू समझ सकती मोहब्बत के उसूलों को, किसी की साँसों में समाकर उसे तन्हा नहीं करते।
आज उसने एक दर्द दिया तो याद आया, हा हमने भी तो दुआओं में उसके सारे दर्द मांगे थे।
कभी घबरा गया होगा दिल तन्हाई में उनका, मेरी तस्वीर को सीने से लगा कर सो गए होंगे।
कैसे गुजरती है मेरी हर एक शाम, तुम्हारे बगैर अगर तुम देख लेते तो, कभी तन्हा न छोड़ते मुझे।
मोहब्बत कभी खत्म नहीं होती, सिर्फ बढती रहती है, या तोसुकून बन कर या फिर दर्द बन कर।
वो हर बार मुझे छोड़ के चले जाते हैं तन्हा, मैं मज़बूत बहुत हूँ लेकिन कोई पत्थर तो नहीं हूँ।
बदलता वक़्त देखा है मैंने, अपने ही हम दर्द को अपना दर्द बनते देखा है मैंने।
इस अकेलेपन से अब तंग आ गया हूं, इसलिए बहुत से आईने खरीद लाया हूं।
बहुत ज्यादा जुल्म करती हैं तुम्हारी यादे, सो जाऊ तो जगा देती हैं उठ जाऊ तो रुला देती हैं।
हालात खराब हो तो अपने ही, गैरो के जैसा बर्ताव करने लगते है।
कुछ कर गुजरने की चाह में कहाँ-कहाँ से गुजरे, अकेले ही नजर आये हम जहाँ-जहाँ से गुजरे।
प्यार सभी को जीना सिखा देता है, वफ़ा के नाम पे मरना सिखा देता है। प्यार नहीं किया तो करके देख लो यार, ज़ालिम हर दर्द सहना सिखा देता है।
बर्बाद बस्तियों में तुम किसे ढूंढते हो, उजड़े हुए लोगों के ठिकाने नहीं होते।
तुम्हारे बगैर ये वक़्त ये दिन और ये रात, गुजर तो जाते हैं मगर गुजारे नहीं जाते।
बारिश की हर एक बूंद को पता है कि अकेलापन क्या होता है।
अकेले ही सहना अकेले ही रहना होता है, अकेलेपन का हर एक आँसू अकेले ही पीना होता है।
मेरी कोशिश हमेशा से ही नाकाम रही, पहले तुझे पाने की अब तुझे भुलाने की।
शायरी शौक नहीं और नाही कारोबार मेरा, बस दर्द जब सह नहीं पाता, तो लिख लेता हूँ।
कुछ लोग बदलने का, कितना भी दावा क्यूँ ना कर ले, पर सच तो ये है की वो, सिर्फ दिखावा कर रहे होते है।
बस मेरी एक आखरी दुआ कबूल हो जाए इस टूटे दिल से तेरी यादे दूर हो जाए।
कुदरत के इन हसीन नजारों का हम क्या करें, तुम साथ नहीं तो इन चाँ द सितारों का क्या करें।
क्या करेंगे महफिलों में हम बता, मेरा दिल रहता है काफिलों में अकेला।
बंद मुट्ठी से याद गिरती है रेत की मानिंद, वो चला गया ज़िन्दगी से ज़र्रा-ज़र्रा कर के।
जख्म ही देना था तो पूरा जिस्म तेरे हवाले था, लेकिन कम्बख़त ने जब भी वार किया, दिल पर ही किया।
भावनाएं मर चुकी हैं, मैने खुद उन्हे अपने हाथो से दफन किया है।
सच कहा था किसी ने तन्हाई में जीना सीख लो, मोहब्बत जितनी भी सच्ची हो साथ छोड़ ही जाती है।
जब इंसान अंदर से टूट जाता है, तो बाहर खामोश हो जाता है।
मेरी पलकों का अब नींद से, कोई ताल्लुक नही रहा, मेरा कौन है ये सोचने में रात गुज़र जाती है।
बहुत बहुत बहुत रोयेगी जिस दिन मैं याद आऊंगा, और बोलेगी एक पागल था जो पागल था सिर्फ मेरे लिए।
मेने बंद कर दिया दिखाना की, मुझे हर्ट होता है क्यूंकि मेरी, फीलिंग् स समझने वाला कोई नहीं है।
कुछ मतलबी लोग ना आते, तो जिंदगी इतनी बुरी भी ना थी।
मुझको मेरे अकेलेपन से अब, शिकायत नहीं है मैं पत्थर हूँ मुझे, खुद से भी मुहब्बत नहीं है।
कितना भी दुनिया के लिए हँस के जी लें हम, रुला देती है फिर भी किसी की कमी कभी-कभी।
तेरी मुहब्बत पर मेरा हक तो नही पर दिल चाहता है, आखरी सास तक तेरा इंतजार करू।
मेरी जिंदगी में ही ऐसा क्यूँ होता है दोस्तों, प्यार बेबफा होता जा रहा है और दोस्त मतलबी।
कभी जब गौर से देखोगे तो इतना जान जाओगे, कि तुम्हारे बिन हर लम् हा हमारी जान लेता है।
तू हजार बार रुठेगी फिर भी तुझे मना लूँगा, तुझसे प्यार किया हे कोई गुनाह नही, जो तुझसे दूर होकर खुद को सजा दूँगा।
एक तुम्हीं थे जिसके दम पे चलती थी साँसें मेरी, लौट आओ जिंदगी से वफा निभाई नहीं जाती।
अगर तुम कहो तो मैं खुद को भुला दूं, तुम्हे भूल जाने की ताक़त नहीं है मुझमे।
तन्हा सफर में अकेले चलते जा रहा हूं तेरी यादों के सहारे जिए जा रहा हूं।